
रिपोर्ट। धरकास मोखा। कच्छ
कच्छ के गांधीधाम में ‘गुजरात पत्रकार एकता परिषद’ ने एकजुट होकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। पत्रकारों को झूठे मामलों में फंसाकर उनकी आवाज दबाने की साजिशों के खिलाफ परिषद ने पूर्व कच्छ एसपी (पुलिस अधीक्षक) को एक ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि बिना किसी निष्पक्ष और प्राथमिक जांच के किसी भी पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जाना चाहिए। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर लगातार बढ़ रहे दबाव और झूठे मुकदमों के जरिए पत्रकारों को प्रताड़ित करने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। असामाजिक तत्व, भ्रष्ट अधिकारी और अवैध गतिविधियों में लिप्त लोग अब पत्रकारों को डराने-धमकाने के लिए झूठी शिकायतों को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं और सच को सामने लाने वाली कलम को रोकने के लिए आए दिन बुनियादी तौर पर झूठे केस दर्ज कराए जा रहे हैं।
परिषद के जिला अध्यक्ष समीरभाई जे. मंगेरी ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि आज के दौर में निष्पक्ष और निडर पत्रकार भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और सामाजिक बुराइयों को उजागर करने का जोखिम भरा काम कर रहे हैं। ऐसी बेखौफ पत्रकारिता कुछ रसूखदार और भ्रष्ट लोगों को हजम नहीं हो रही है, जिसके कारण पत्रकारों को डराने और उनकी कलम को हमेशा के लिए खामोश करने के मकसद से उनके खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। पत्रकार परिषद की यह स्पष्ट मांग है कि यदि किसी पत्रकार के खिलाफ कोई भी शिकायत मिलती है, तो पुलिस को जल्दबाजी में सीधे एफआईआर दर्ज नहीं करनी चाहिए। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पहले जमीनी स्तर पर निष्पक्ष और प्राथमिक जांच की जाए, और यदि जांच में शिकायत सही और सबूतों पर आधारित पाई जाती है, तभी कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए। किसी भी दुर्भावना या द्वेष से प्रेरित होकर की गई झूठी शिकायत के आधार पर किसी भी पत्रकार की गिरफ्तारी या उसकी मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। पत्रकारों ने साफ शब्दों में संदेश दिया है कि अगर कलम डरेगी तो सच मर जाएगा, और यदि सच ही मर गया तो लोकतंत्र कभी जिंदा नहीं रह पाएगा।











